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भ्रष्टाचार उजागर हुआ तो विभाग नही दिलीप सोनवानी बौखलाहट मे आया..? समाचार प्रकाशित पत्रकारो को धमकाने वाला खुद कौन..? नाम लेकर दिलीप सोनवानी आत्महत्या की क्यों दे रहा चेतावनी..!

मिथलेश आयम, रायपुर(खबरो का राजा) : बिलासपुर जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पंचायत स्तर पर आवास निर्माण का कार्य चला था जिसकी पारदर्शिता और पत्रकारों की सुरक्षा दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनपद पंचायत कोटा अंतर्गत ग्राम पंचायत चपोरा के आश्रित ग्राम बंसाझार स्थित बैगा मोहल्ले में आवास निर्माण में भ्रष्टाचार के कथित आरोप सामने आए हैं। इस संबंध में कई समाचार, न्यूज़ चैनलों और पोर्टलों पर प्रकाशित हुए हैं, जिनमें हितग्राहियों ने तत्कालीन सचिव की संलिप्तता और निर्माण कार्य में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। हितग्राहियों के अनुसार, आवास योजना के तहत स्वीकृत निर्माण कार्य में गुणवत्ता का अभाव रहा। दीवारों में अधूरा प्लास्टर, घटिया सामग्री के उपयोग और तय समय में कार्य पूरा न होने जैसे आरोप लगाए गए हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदारों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते मामला मीडिया तक पहुंचा। खबरें सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग भी उठी है। इसी बीच, खबर प्रकाशित होने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि दिलीप सोनवानी जो स्वयं CNI न्यूज़ चैनल का जिला प्रमुख है, जो संबंधित समाचार प्रकाशित करने वाले पत्रकारों को कथित तौर पर फोन कर आत्महत्या कर लूंगा बोलता है जिसे सम्बंधित पत्रकारों ने स्पष्ट कहा है हमको फोन मत करो जाँच का विषय है जाँच हो जाने दो।और पत्रकारों का आरोप है दिलीप सोनवानी द्वारा व्यक्तिगत रूप से पत्रकारों का नाम लिखते हुए “मैं आत्महत्या कर लूंगा” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया। आरोप के अनुसार, इमरान खान, प्रमोद यादव, जीशान अंसारी, रवि ठाकुर, मिथलेश आयम, शेख अजीज खान, बैजनाथ पटेल एवं मनहरण कश्यप का नाम लेकर इस तरह की चेतावनियाँ दी गईं, जिससे पत्रकारों को मानसिक रूप से डराने-धमकाने और दबाव बनाने का प्रयास किया गया। पत्रकार संगठनों का कहना है कि इस तरह की धमकियाँ न केवल कानूनन गंभीर अपराध की श्रेणी में आती हैं, बल्कि यह स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता पर सीधा हमला है। इस पूरे मामले मे कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या दिलीप सोनवानी की भूमिका केवल प्रतिक्रिया तक सीमित है, या फिर वे कथित भ्रष्टाचार और गुणवत्ताहीन आवास निर्माण के मामला में किसी तरह से संलिप्त हैं? क्या खबरो मे जिस तत्कालीन सचिव पर आरोप लगे हैं, उन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है? इन सवालो का उत्तर निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है। पत्रकारों का कहना है कि उनका काम जनहित में तथ्य सामने लाना है और उन्होंने हितग्राहियों के आरोपो का तथ्य के आधार पर प्रकाशित किया गया। साथ ही, पत्रकारो ने एक टूक शब्दों में कहें है :-“निष्पक्ष पत्रकारिता रुकेगी नहीं।” और सुरक्षा को लेकर पत्रकारों ने प्रशासन से संरक्षण की मांग की है और पुलिस से आग्रह किया है कि कथित धमकियों की गंभीरता से जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, आवास निर्माण से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की भी समयबद्ध और निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए, ताकि जनविश्वास बहाल हो और भयमुक्त पत्रकारिता जारी रहे।

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